एक कॉन्स्टेबल को ड्यूटी पर सोते हुए पकड़ा गया था, जिसे उच्च न्यायालय से राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि नींद एक मानवीय आवश्यकता है और इसके लिए किसी को दंडित नहीं किया जा सकता है।
कॉन्स्टेबल को ड्यूटी पर सोते हुए पकड़ा गया था, जिसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई थी। लेकिन कॉन्स्टेबल ने उच्च न्यायालय में अपील की, जिसमें उन्होंने कहा कि वह थकावट के कारण सो गए थे और इसके लिए उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता है।
उच्च न्यायालय ने कॉन्स्टेबल की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि नींद एक मानवीय आवश्यकता है और इसके लिए किसी को दंडित नहीं किया जा सकता है। अदालत ने आगे कहा कि कॉन्स्टेबल को दंडित करने से पहले उनके थकावट के कारणों को भी ध्यान में रखना चाहिए था।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि उच्च न्यायालय ने मानवीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया है।
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